Sunday, November 29, 2015

Your Compassion

 तुम्हारी करुणा
 Your Compassion

तुम्हारी करुणा का प्रकाश
सूर्य, चन्द्र और नक्षत्रों के माध्यम से
सम्पूर्ण ब्रह्मांड में उतर, फैल रहा है।
सारे लोग पुलकित और हर्षित हैं
तुम्हें पा।

अभिलाषा है हमारी
हमारी आँखों के आगे
विद्यमान घना अंधकार,
सूखा, खुरदुरा पतझर अब
प्रखर आलोक तथा गीले बसंत में
रूपांतरित हो जाये।

हमारी चेतना के
धरातल का सूखा कोष
रस से भर-भर जाये।

तुम्हारी करुणा के दीपक की ज्योति
हमारे बाहर-भीतर बिखर जाये।

बाहर-भीतर का कोलाहल शांत हो जाये।
हमारे प्राप्य हमें मिल जायें।

The light of your compassion
through the sun, the moon and the constellation
is falling, spreading in the whole universe.
All the people are thrilled and happy
to have You.

We have a longing— 
let the pervasive darkness 
before our eyes, 
the dried, unsmooth autumn 
transform now
into sharp luster and dewy spring.

Let the dried store
of our consciousness 
fill with boundless pleasure.

Let the splendour of your compassion 
spread within and without us.

Let the din within and without pacify.
May we get what we deserve.

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